HI FRIENDS!!!! I am RAVIKANT VISHWAKARMA और आज मैं आप के लिए लेकर आया हूँ मेघदूत कार्णिक की लिखी हुई किताब DRONACHARYA AT WORK PLACE.| इस BOOK में लेखक मेघदूत कार्णिक बताते हैं कि जीवन की हर परिस्थिति में महाभारत मौजूद है. | यह महाकाव्य सबको बोध कराने के लिए बनाया गया है |
इस किताब में भी महाभारत को आधार बना कर CORPORATE LIFE की PROBLEMS को कैसे सुलझाया जा सकता है ,इस पर प्रकाश डाला गया है|
DRONACHARYA AT WORKPLACE मैं 8 छोटी छोटी कहानियां हैं और आज का मेरा ये ब्लॉग उनमे से ही एक कहानी है |
"I WILL MEET YOU ON TUESDAY AT 9 AM" त्विषा ने बिना जबाब दिए ही फोन रख दिया | यह फोन उसके EX-MANAGER सुजॉय का था ,उसने त्विषा को अभी-2 एक जॉब ऑफर किया था | बहुत अच्छी सैलरी और साथ में प्रमोशन भी लेकिन त्विषा के मन में ऑफर स्वीकार करने या न करने की उलझन थी |
त्विषा TOMFINA नाम की कंपनी में सीनियर एसोसिएट थी | वो बहुत समझदार और SOFT SPOKENऔर साथ ही ASSERTIVE भी थी | त्विषा ने सात साल पहले सुजॉय की कंपनी को एक एनालिस्ट के तौर पर ज्वाइन किया और कुछ ही समय में टीम की एक महत्त्वपूर्ण सदस्य बन गयी थी | सुजॉय त्विषा पर बहुत विश्वास करता था ,दोनों को एक दूसरे के साथ काम करने में बहुत मज़ा आता था |
अब सुजॉय ने यह जॉब छोड़ दी थी और चाहता था की त्विशा भी उसकी कंपनी ज्वाइन करले ,लेकिन त्विषा के अभी sure नहीं थी उसके मन में अपनी कंपनी को छड़ने और नए ऑफर को लेकर उथल-पुथलचल रही थी |
वो घर पहुंची और अपना बैग एक तरफ फेंक कर अपने कमरे में किताब पढ़ने चली गयी लेकिन अचानक उसे उसके छोटे भाई करण के कमरे से TV के शोर से उसे इर्रिटेशन होने लगी |
करण और त्विषा का स्वभाव एकदम विपरीत था ,एक ऒर जहां त्विषा समझदार ,मेहनती ,ईमानदार और शांत थी तो दूसरी ऒर करण भी बहुत मेहनती और ब्रिलियंट था लेकिन उसके रुझान बहुत अलग थे | उसे अपने दोस्तों के साथ कई सारे विषयों पर लम्बे डिस्कशन करना बहुत पसंद था | वो होशियार और हाजिर जवाब दोनों ही था और एक साल का ब्रेक लेकर CAT की तैयारी कर रहा था |
आज करण का मूड बहुत खराब था उसका उसके दोस्तों से किसी पोलिटिकल सब्जेक्ट पर डिस्कशन हो रहा था और अपने दोस्त के रिएक्शन ने करण को SHOCK कर दिया था ,करण को एहसास हुआ कि पढ़ाई लिखाई ही सब कुछ नहीं है ज़िन्दगी में MINDSET बदलने की ज़रुरत है | वो गुस्से से घर आया और म्यूजिक को FULL VOLUME करके अपनी भड़ास निकालने लगा | आज त्विशा के दिमाग की उथल पुथल से उस MUSIC का एक तरह से घमासान हो गया |
" कितनी बार कहा की वॉल्यूम कम रखा कर ,पूरा दिन काम करके इस घर में थोड़ी शान्ति तो एक्सपेक्ट कर ही सकती हूँ | " त्विषा करण पर बहुत गुस्सा हुई और दोनों में इतनी लड़ाई हुई कि दोनों ने अपने अपने कमरे का दरवाजा एक दुसरे के मुँह पर बंद कर दिए |
त्विषा गुस्से में खाना खाने भी नहीं आयी, रात के 11 बजे करण ने त्विषा का दरवाजा नॉक किया |
"कुछ चाहिए त्विषा ,I am SORRY मैंने म्यूजिक भी बंद कर दिया है बाहर आओ और खाना खालो |"
" मुझे भूख नहीं है| "
करण - क्या बात है!!!! तुम प्यार और हवा पर ज़िंदा रह सकती हो | मुझे भी सिखा दो यार मेरे पेट में तो चूहे कूद रहे हैं | करण ने भी अभी तक खाना नहीं खाया ,ये बात त्विषा को अच्छी नहीं लगी, उसका दिल पिघल गया और वो बाहर आ गयी | दोनों डिनर करने लगे |
करण - क्या प्रॉब्लम है तेरी ?
त्विषा -क्या मतलब है तुम्हारा? मुझे क्या प्रॉब्लम हो सकती है?
करण - Come on त्विषा !! बचपन से जानता हूँ तुझे,तुम्हारा चेहरा खुली किताब है|
त्विषा -U don't know about Corporate Life!!!! तू मेरी क्या मदद करेगा?
करण -अगर तू मुझे अपनी प्रॉब्लम बताएगी तो दो बातें होंगी। एक तो तुझे हल्का मेहसूस होगा और दूसरा ये की शायद तू खुद प्रॉब्लम की जड़ तक पहुंच जाए। और फिर तुझे तो पता है कि मेरे पास तो अपने प्रधान मंत्री की प्रोब्लेम्स का भी solution है बस मेरी प्रॉब्लम है कि मेरी कोई सुनता नहीं है।
करण कोई भी मुश्किल परिस्थिति को humor से आसान बना सकता था।
त्विषा ने उसे अपनी दुविधा बतायी।
"U know sujoy????? "
करण -तेरा Ex - Boss ना !!! उसने तो TOMFINA छोड़ दी थी ना ?
त्विषा - हाँ वही !!! उसने मुझे .......
करण - उसने क्या? त्विषा ! बोलो उसने क्या????
त्विषा - वो चाहता है की उसकी कंपनी में वाईस प्रेसीडेंट की पोज़िशन पर ज्वाइन कर लूँ और वो मुझे बहुत अच्छी INCREMENT भी ऑफर कर रहा है।
करण - वाह त्विषा !!! और क्या चाहिए तुझे??? अब तो मेरी नयी बाइक भी फाइनेंस हो जाएगी।
त्विषा - इतना आसान नहीं है ये करण, मैं अपनी कंपनी में अच्छा कर रही हूँ। मुझ पर बहुत बड़ी जिम्मेदारी है और यही समय है मुझे अपने आप को साबित करने का पर अब यह आकर्षक ऑफर "आकर्षण पाप है "
करण - तू और तेरे ये बाहियात 1 लाइनर !! OK !चल कुछ और बात करते हैं। तुझे क्या लगता है? महाभारत में सबसे बड़ा धनुर्धर कौन था ?
त्विषा - अर्जुन और कौन??? तू किस तरफ इशारा कर रहा है?
करण - समझाने दे मुझे , ये एक फेमस कहानी है कौरवों और पांडवों के बीच में हुई तीरंदाज़ी की प्रतियोगिता में गुरु द्रोणाचार्य अपने शिष्यों को जंगल में ले गए और उन्होंने घास का एक पक्षी बना कर दूर पेड़ पर रख दिया। उस पक्षी की आँख पर निशाना साधना था लेकिन निशाना साधने से पहले सभी को क्या दिख रहा है ये बताना था। उन्होंने एक-एक करके सबको बुलाया।
एक राजकुमार ने कहा कि उसे एक पक्षी दिख रहा है जो एक पेड़ पर बैठा है ,द्रोणाचार्य ने उसे एक तरफ खड़े होने के लिए कहा। कहा मुझे हरे रंग का पक्षी दिख रहा है उसे भी उन्होंने एक तरफ खड़ा कर दिया। एक-एक करके वे आते गए और पक्षी ,पेड़ और आसपास चीजों के बारे में बताते गए, पर किसी को तीर चलाने की अनुमति नहीं दी गयी।
अब अर्जुन की बारी आयी ,उसने कहा मुझे सिर्फ पक्षी की आँख दिख रही है। द्रोणाचार्य ने कहा "तुम्हे और क्या दिख रहा है ?"अर्जुन ने कहा "कुछ नहीं मुझे सिर्फ आँख ही दिख रही है "इस पर द्रोणाचार्य ने सिर्फ अर्जुन को तीर चलाने की अनुमति दी।
त्विषा - बहुत अच्छी कहानी है करण !!! यह कहानी तुम्हें FOCUS का इम्पोर्टेंस बताती है। तुम ही रोज अपना ,समय खराब करते रहते हो मूवी देखने में, म्यूजिक सुनने में। अगर तुम्हे CAT crack करना है और किसी अच्छे इंस्टिट्यूट में एडमिशन लेना है तो FOCUS बहुत जरूरी है।
करण -Thanks Twisha for your advise!!!! लेकिन मेरा point अलग है। क्या तुम्हे आया 105 बच्चों में से सिर्फ 1 को ही मौका मिला ,बाकी सबको हटा दिया गया। तुम्हें अहसास हुआ क्या कि शायद उनमें से कुछ बहुत अच्छे धनुर्धारी थे और शायद पक्षी की आँख में वास्तव में तीर मार देते ?
त्विषा - बहुत रोचक पॉइंट है करण !लेकिनअवसर उन्ही का दरवाजा खटखटाता है जो focused रहता है।
करण - मौका किसने त्विषा ? अर्जुन ने छीना या द्रोणाचार्य ने दिया?
त्विषा - कोई फर्क नहीं पड़ता। अर्जुन सबसे बेहतर तीरंदाज था उसने यह साबित कर दिया पक्षी की आँख में तीर से निशाना लगाकर।
करण - तुझे क्या लगता है मेरा नाम करण क्यों है?
त्विषा - मम्मी पापा को अच्छा लगा simple !!!!!
करण -चल बता महाभारत में पापा का सबसे पसंदीदा कॅरक्टर कौन है ?
त्विषा - हाँ पता है करण !!! इसलिए ये तेरा नाम रखा गया।
करण - तुझे पता है करण भी अर्जुन जितना ही कुशल था और फिर एक एकलव्य था जिसे गुरु दखिना में द्रोणाचार्य को अपना अंगूठा देना पड़ा।
त्विषा - मुझे तेरा पॉइंट समझ आ गया। अर्जुन शायद सबसे बेहतरीन धनुर्धर नहीं था लेकिन अपने गुरु के दिल के करीब था। पर इस सब में अर्जुन की क्या गलती है?
करण - कुछ नहीं बस कुछ लोग Lucky होते हैं।
त्विषा - लोग इसलिए Lucky होते हैं क्योंकि वो मेहनत करते हैं।
करण - ठीक हैं sorry!!!बेशक अर्जुन मेहनती ,कुशल था और extremely talented भी था। पर पूरे महाभारत में अर्जुन protected था। पहले द्रोणाचार्य और फिर कुरुक्षेत्र में कृष्णा द्वारा।
त्विषा - तो क्या?? वो कामयाब था।
करण - हां वो तो था। पर अगर उसे अकेले छोड़ दिया जाता तो क्या वो युद्ध जीत पता या बच पाता ?
त्विषा - तेरा पॉइंट सही है। पर यही तो द्रोणाचार्य और कृष्ण ने मेंटर और टीचर का role निभाया है न।
करण - बहुत अच्छा पॉइंट है त्विषा !!याद है युद्ध के पहले अर्जुन शस्त्र त्यागना चाहता था क्योंकि वो अपने ही भाइयों से युद्ध नहीं चाहता था और जब कृष्ण ने उसे गीता का पाठ पढ़ाया और उसे धर्म के बारे में बताया तब वो युद्ध के लिए तैयार हुआ।
त्विषा - मेरे हिसाब से अर्जुन बहुत काबिल और विनर मेंटलिटी वाला थालेकिन भाइयों से युद्ध वाली बात से बिचलित था। वैसे भी जब आपका सामना रिश्तेदारों से विरोधी के रूप में होता है तो decision लेना और भी मुश्किल हो जाता है।
त्विषा अब यह conversation को एन्जॉय कर रही थी ,और वो नहीं जानती थी पर यह एक बहुत बड़ा डायवर्सन था सुजॉय के ऑफर से और वो थोड़ा relaxed भी महसूस कर रही थी।
करण -बहुत बढ़िया त्विशा अब हम सही जा रहे हैं। बहुत दिन हो गए थे हमें कोई इंटरेस्टिंग डिस्कशन किये हुए। अच्छा ये बताओ जब द्रोणाचार्य ने अर्जुन को तीर चलाने को कहा तो बाकी शिष्यों को कैसा लगा होगा ?
"मुझे नहीं पता ,तू बता...... "
करण -मेरे ख्याल से उनमे तो बहुत दुखी होंगे कि उन्हें कोई मौका नहीं मिला और शायद वो निशाना लगा सकते थे। और यही दुश्मनी का बीज पड़ गया था जो आगे जाकर युद्ध का कारण बना।
त्विषा - करण इअसा कॉर्पोरेट लाइफ में भी होता है जो सबसे बेस्ट होते हैं वही बॉस के फेवरेट होते हैं उन्ही को सारे प्रोजेक्ट्स और बाद में प्रमोशन मिलते हैं।
करण - पर इतिहास में आज भी इस बात पर बहस है की क्या अर्जुन वाकई बेस्ट धनुर्धर था। तुझे बेस्ट तीरंदाज बनना है या गुरु द्रोणाचार्य का अर्जुन ?
त्विषा - तू किस तरफ इशारा कर रहा है ?
करण ने कोई जबाब नहीं दिया उसको जो कहना था बड़ी मासूमियत से उसने कह दिया था और वो चाहता था कि त्विषा इस बात को खुद समझे।
लेकिन त्विशा सीरियस होकर पूछने लगी तब करण को लगा की उसने दुखती राग पर हाथ रख दिया है।
करण -देख मुझे गलत मत समझ। हर एक को एक द्रोणाचार्य की जरूरत होती है कोई अपनी माँ के पेट से सीख कर तो नहीं आता लेकिन जब उड़ना सीख जाए तो अपनी उड़ान खुद भरना चाहिए।
त्विषा -दिलचस्प पॉइंट है।
करण की बातों का असर अब उस पर होने लगा था।
करण -एक और बात बता त्विषा !! क्या तेरी आर्गेनाईजेशन में लोग सोचते हैं की तू आज जो कुछ है वो सुजॉय के कारण है ?
अब त्विशा की दुखती राग पर हाथ रखा गया था लेकिन त्विशा ने गुस्से पर काबू करते हुए कोई जबाब नहीं दिया लेकिन उसे याद आया कि कैसे उसने जब कंपनी ज्वाइन की थी तब धीरे धीरे वो सुजॉय की favourite हो गयी थी और ऑफिस में लोग उसके और सुजॉय के बारे में काना फुसी करने लगे थे।
त्विशा चुप थी उसने अपनी छास पी और बर्तन उठा कर करण को गले लगाया और अपने कमरे में चली गयी। अब वो जानती थी कि उसको अब क्या करना है। उसे अपना रास्ता खुद ढूंढना है वो भी अपनी शर्तों पर। उसे कुछ साबित करना था दुनिया को.... नहीं अपने आप को कि क्या वो द्रोणाचार्य की परछाई से बाहर आकर कामयाब हो सकती है ???
पर एक बात तो पक्की है उसने अपने द्रोणाचार्य को पीछे छोड़ दिया था।
अब सुजॉय ने यह जॉब छोड़ दी थी और चाहता था की त्विशा भी उसकी कंपनी ज्वाइन करले ,लेकिन त्विषा के अभी sure नहीं थी उसके मन में अपनी कंपनी को छड़ने और नए ऑफर को लेकर उथल-पुथलचल रही थी |
वो घर पहुंची और अपना बैग एक तरफ फेंक कर अपने कमरे में किताब पढ़ने चली गयी लेकिन अचानक उसे उसके छोटे भाई करण के कमरे से TV के शोर से उसे इर्रिटेशन होने लगी |
करण और त्विषा का स्वभाव एकदम विपरीत था ,एक ऒर जहां त्विषा समझदार ,मेहनती ,ईमानदार और शांत थी तो दूसरी ऒर करण भी बहुत मेहनती और ब्रिलियंट था लेकिन उसके रुझान बहुत अलग थे | उसे अपने दोस्तों के साथ कई सारे विषयों पर लम्बे डिस्कशन करना बहुत पसंद था | वो होशियार और हाजिर जवाब दोनों ही था और एक साल का ब्रेक लेकर CAT की तैयारी कर रहा था |
आज करण का मूड बहुत खराब था उसका उसके दोस्तों से किसी पोलिटिकल सब्जेक्ट पर डिस्कशन हो रहा था और अपने दोस्त के रिएक्शन ने करण को SHOCK कर दिया था ,करण को एहसास हुआ कि पढ़ाई लिखाई ही सब कुछ नहीं है ज़िन्दगी में MINDSET बदलने की ज़रुरत है | वो गुस्से से घर आया और म्यूजिक को FULL VOLUME करके अपनी भड़ास निकालने लगा | आज त्विशा के दिमाग की उथल पुथल से उस MUSIC का एक तरह से घमासान हो गया |
" कितनी बार कहा की वॉल्यूम कम रखा कर ,पूरा दिन काम करके इस घर में थोड़ी शान्ति तो एक्सपेक्ट कर ही सकती हूँ | " त्विषा करण पर बहुत गुस्सा हुई और दोनों में इतनी लड़ाई हुई कि दोनों ने अपने अपने कमरे का दरवाजा एक दुसरे के मुँह पर बंद कर दिए |
त्विषा गुस्से में खाना खाने भी नहीं आयी, रात के 11 बजे करण ने त्विषा का दरवाजा नॉक किया |
"कुछ चाहिए त्विषा ,I am SORRY मैंने म्यूजिक भी बंद कर दिया है बाहर आओ और खाना खालो |"
" मुझे भूख नहीं है| "
करण - क्या बात है!!!! तुम प्यार और हवा पर ज़िंदा रह सकती हो | मुझे भी सिखा दो यार मेरे पेट में तो चूहे कूद रहे हैं | करण ने भी अभी तक खाना नहीं खाया ,ये बात त्विषा को अच्छी नहीं लगी, उसका दिल पिघल गया और वो बाहर आ गयी | दोनों डिनर करने लगे |
करण - क्या प्रॉब्लम है तेरी ?
त्विषा -क्या मतलब है तुम्हारा? मुझे क्या प्रॉब्लम हो सकती है?
करण - Come on त्विषा !! बचपन से जानता हूँ तुझे,तुम्हारा चेहरा खुली किताब है|
त्विषा -U don't know about Corporate Life!!!! तू मेरी क्या मदद करेगा?
करण -अगर तू मुझे अपनी प्रॉब्लम बताएगी तो दो बातें होंगी। एक तो तुझे हल्का मेहसूस होगा और दूसरा ये की शायद तू खुद प्रॉब्लम की जड़ तक पहुंच जाए। और फिर तुझे तो पता है कि मेरे पास तो अपने प्रधान मंत्री की प्रोब्लेम्स का भी solution है बस मेरी प्रॉब्लम है कि मेरी कोई सुनता नहीं है।
करण कोई भी मुश्किल परिस्थिति को humor से आसान बना सकता था।
त्विषा ने उसे अपनी दुविधा बतायी।
"U know sujoy????? "
करण -तेरा Ex - Boss ना !!! उसने तो TOMFINA छोड़ दी थी ना ?
त्विषा - हाँ वही !!! उसने मुझे .......
करण - उसने क्या? त्विषा ! बोलो उसने क्या????
त्विषा - वो चाहता है की उसकी कंपनी में वाईस प्रेसीडेंट की पोज़िशन पर ज्वाइन कर लूँ और वो मुझे बहुत अच्छी INCREMENT भी ऑफर कर रहा है।
करण - वाह त्विषा !!! और क्या चाहिए तुझे??? अब तो मेरी नयी बाइक भी फाइनेंस हो जाएगी।
त्विषा - इतना आसान नहीं है ये करण, मैं अपनी कंपनी में अच्छा कर रही हूँ। मुझ पर बहुत बड़ी जिम्मेदारी है और यही समय है मुझे अपने आप को साबित करने का पर अब यह आकर्षक ऑफर "आकर्षण पाप है "
करण - तू और तेरे ये बाहियात 1 लाइनर !! OK !चल कुछ और बात करते हैं। तुझे क्या लगता है? महाभारत में सबसे बड़ा धनुर्धर कौन था ?
त्विषा - अर्जुन और कौन??? तू किस तरफ इशारा कर रहा है?
करण - समझाने दे मुझे , ये एक फेमस कहानी है कौरवों और पांडवों के बीच में हुई तीरंदाज़ी की प्रतियोगिता में गुरु द्रोणाचार्य अपने शिष्यों को जंगल में ले गए और उन्होंने घास का एक पक्षी बना कर दूर पेड़ पर रख दिया। उस पक्षी की आँख पर निशाना साधना था लेकिन निशाना साधने से पहले सभी को क्या दिख रहा है ये बताना था। उन्होंने एक-एक करके सबको बुलाया।
एक राजकुमार ने कहा कि उसे एक पक्षी दिख रहा है जो एक पेड़ पर बैठा है ,द्रोणाचार्य ने उसे एक तरफ खड़े होने के लिए कहा। कहा मुझे हरे रंग का पक्षी दिख रहा है उसे भी उन्होंने एक तरफ खड़ा कर दिया। एक-एक करके वे आते गए और पक्षी ,पेड़ और आसपास चीजों के बारे में बताते गए, पर किसी को तीर चलाने की अनुमति नहीं दी गयी।
अब अर्जुन की बारी आयी ,उसने कहा मुझे सिर्फ पक्षी की आँख दिख रही है। द्रोणाचार्य ने कहा "तुम्हे और क्या दिख रहा है ?"अर्जुन ने कहा "कुछ नहीं मुझे सिर्फ आँख ही दिख रही है "इस पर द्रोणाचार्य ने सिर्फ अर्जुन को तीर चलाने की अनुमति दी।
त्विषा - बहुत अच्छी कहानी है करण !!! यह कहानी तुम्हें FOCUS का इम्पोर्टेंस बताती है। तुम ही रोज अपना ,समय खराब करते रहते हो मूवी देखने में, म्यूजिक सुनने में। अगर तुम्हे CAT crack करना है और किसी अच्छे इंस्टिट्यूट में एडमिशन लेना है तो FOCUS बहुत जरूरी है।
करण -Thanks Twisha for your advise!!!! लेकिन मेरा point अलग है। क्या तुम्हे आया 105 बच्चों में से सिर्फ 1 को ही मौका मिला ,बाकी सबको हटा दिया गया। तुम्हें अहसास हुआ क्या कि शायद उनमें से कुछ बहुत अच्छे धनुर्धारी थे और शायद पक्षी की आँख में वास्तव में तीर मार देते ?
त्विषा - बहुत रोचक पॉइंट है करण !लेकिनअवसर उन्ही का दरवाजा खटखटाता है जो focused रहता है।
करण - मौका किसने त्विषा ? अर्जुन ने छीना या द्रोणाचार्य ने दिया?
त्विषा - कोई फर्क नहीं पड़ता। अर्जुन सबसे बेहतर तीरंदाज था उसने यह साबित कर दिया पक्षी की आँख में तीर से निशाना लगाकर।
करण - तुझे क्या लगता है मेरा नाम करण क्यों है?
त्विषा - मम्मी पापा को अच्छा लगा simple !!!!!
करण -चल बता महाभारत में पापा का सबसे पसंदीदा कॅरक्टर कौन है ?
त्विषा - हाँ पता है करण !!! इसलिए ये तेरा नाम रखा गया।
करण - तुझे पता है करण भी अर्जुन जितना ही कुशल था और फिर एक एकलव्य था जिसे गुरु दखिना में द्रोणाचार्य को अपना अंगूठा देना पड़ा।
त्विषा - मुझे तेरा पॉइंट समझ आ गया। अर्जुन शायद सबसे बेहतरीन धनुर्धर नहीं था लेकिन अपने गुरु के दिल के करीब था। पर इस सब में अर्जुन की क्या गलती है?
करण - कुछ नहीं बस कुछ लोग Lucky होते हैं।
त्विषा - लोग इसलिए Lucky होते हैं क्योंकि वो मेहनत करते हैं।
करण - ठीक हैं sorry!!!बेशक अर्जुन मेहनती ,कुशल था और extremely talented भी था। पर पूरे महाभारत में अर्जुन protected था। पहले द्रोणाचार्य और फिर कुरुक्षेत्र में कृष्णा द्वारा।
त्विषा - तो क्या?? वो कामयाब था।
करण - हां वो तो था। पर अगर उसे अकेले छोड़ दिया जाता तो क्या वो युद्ध जीत पता या बच पाता ?
त्विषा - तेरा पॉइंट सही है। पर यही तो द्रोणाचार्य और कृष्ण ने मेंटर और टीचर का role निभाया है न।
करण - बहुत अच्छा पॉइंट है त्विषा !!याद है युद्ध के पहले अर्जुन शस्त्र त्यागना चाहता था क्योंकि वो अपने ही भाइयों से युद्ध नहीं चाहता था और जब कृष्ण ने उसे गीता का पाठ पढ़ाया और उसे धर्म के बारे में बताया तब वो युद्ध के लिए तैयार हुआ।
त्विषा - मेरे हिसाब से अर्जुन बहुत काबिल और विनर मेंटलिटी वाला थालेकिन भाइयों से युद्ध वाली बात से बिचलित था। वैसे भी जब आपका सामना रिश्तेदारों से विरोधी के रूप में होता है तो decision लेना और भी मुश्किल हो जाता है।
त्विषा अब यह conversation को एन्जॉय कर रही थी ,और वो नहीं जानती थी पर यह एक बहुत बड़ा डायवर्सन था सुजॉय के ऑफर से और वो थोड़ा relaxed भी महसूस कर रही थी।
करण -बहुत बढ़िया त्विशा अब हम सही जा रहे हैं। बहुत दिन हो गए थे हमें कोई इंटरेस्टिंग डिस्कशन किये हुए। अच्छा ये बताओ जब द्रोणाचार्य ने अर्जुन को तीर चलाने को कहा तो बाकी शिष्यों को कैसा लगा होगा ?
"मुझे नहीं पता ,तू बता...... "
करण -मेरे ख्याल से उनमे तो बहुत दुखी होंगे कि उन्हें कोई मौका नहीं मिला और शायद वो निशाना लगा सकते थे। और यही दुश्मनी का बीज पड़ गया था जो आगे जाकर युद्ध का कारण बना।
त्विषा - करण इअसा कॉर्पोरेट लाइफ में भी होता है जो सबसे बेस्ट होते हैं वही बॉस के फेवरेट होते हैं उन्ही को सारे प्रोजेक्ट्स और बाद में प्रमोशन मिलते हैं।
करण - पर इतिहास में आज भी इस बात पर बहस है की क्या अर्जुन वाकई बेस्ट धनुर्धर था। तुझे बेस्ट तीरंदाज बनना है या गुरु द्रोणाचार्य का अर्जुन ?
त्विषा - तू किस तरफ इशारा कर रहा है ?
करण ने कोई जबाब नहीं दिया उसको जो कहना था बड़ी मासूमियत से उसने कह दिया था और वो चाहता था कि त्विषा इस बात को खुद समझे।
लेकिन त्विशा सीरियस होकर पूछने लगी तब करण को लगा की उसने दुखती राग पर हाथ रख दिया है।
करण -देख मुझे गलत मत समझ। हर एक को एक द्रोणाचार्य की जरूरत होती है कोई अपनी माँ के पेट से सीख कर तो नहीं आता लेकिन जब उड़ना सीख जाए तो अपनी उड़ान खुद भरना चाहिए।
त्विषा -दिलचस्प पॉइंट है।
करण की बातों का असर अब उस पर होने लगा था।
करण -एक और बात बता त्विषा !! क्या तेरी आर्गेनाईजेशन में लोग सोचते हैं की तू आज जो कुछ है वो सुजॉय के कारण है ?
अब त्विशा की दुखती राग पर हाथ रखा गया था लेकिन त्विशा ने गुस्से पर काबू करते हुए कोई जबाब नहीं दिया लेकिन उसे याद आया कि कैसे उसने जब कंपनी ज्वाइन की थी तब धीरे धीरे वो सुजॉय की favourite हो गयी थी और ऑफिस में लोग उसके और सुजॉय के बारे में काना फुसी करने लगे थे।
त्विशा चुप थी उसने अपनी छास पी और बर्तन उठा कर करण को गले लगाया और अपने कमरे में चली गयी। अब वो जानती थी कि उसको अब क्या करना है। उसे अपना रास्ता खुद ढूंढना है वो भी अपनी शर्तों पर। उसे कुछ साबित करना था दुनिया को.... नहीं अपने आप को कि क्या वो द्रोणाचार्य की परछाई से बाहर आकर कामयाब हो सकती है ???
पर एक बात तो पक्की है उसने अपने द्रोणाचार्य को पीछे छोड़ दिया था।